मध्य पूर्व में महायुद्ध: ईरान और इज़राइल
के बीच गहराता संकट (अप्रैल 2026)
आज की तारीख, 5 अप्रैल 2026 तक, ईरान और इज़राइल के बीच का संघर्ष एक पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है। यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे मध्य पूर्व (Middle East) को अपनी चपेट में ले लिया है।
ताज़ा हालात: युद्ध का 37वां दिन
पिछले 24 घंटों में इस युद्ध ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है:
ट्रम्प का अल्टीमेटम: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे की समय सीमा दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को नहीं खोला और शांति समझौते पर बात नहीं की, तो ईरान के बिजली घरों और पुलों जैसे बुनियादी ढांचे पर "कयामत" बरपा दी जाएगी।
अमेरिकी पायलट का रेस्क्यू: ईरान द्वारा मार गिराए गए अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान के दूसरे पायलट को एक "साहसी" ऑपरेशन में बचा लिया गया है। ईरान ने दावा किया है कि इस रेस्क्यू मिशन के दौरान उसने दो और अमेरिकी विमानों को मार गिराया है।
लेबनान और खाड़ी देशों पर हमले: इज़राइल ने बेरूत (Beirut) में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भारी बमबारी शुरू कर दी है। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कुवैत के तेल और बिजली संयंत्रों पर ड्रोन हमले किए हैं।
युद्ध के प्रमुख कारण
परमाणु कार्यक्रम: इज़राइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता आया है।
नेतृत्व का खात्मा: फरवरी 2026 में एक संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद तनाव चरम पर पहुँच गया।
छद्म युद्ध (Proxy War): ईरान द्वारा हमास और हिजबुल्लाह जैसे समूहों को समर्थन देना और इज़राइल द्वारा ईरान के भीतर गुप्त ऑपरेशन करना इस दुश्मनी की पुरानी जड़ें हैं।
वैश्विक और भारत पर प्रभाव
ऊर्जा संकट: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
भारत की स्थिति: भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है। साथ ही, खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है।
आर्थिक चोट: शेयर बाजारों में अनिश्चितता और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।
